बिहार के 85 प्रखंडों में खुलेंगी डिजिटल लाप्लेटफॉर्मइब्रेरी, छात्रों को मिलेगा स्मार्ट पढ़ाई का !

बिहार सरकार इस वर्ष 85 प्रखंडों में डिजिटल लाइब्रेरी शुरू करने जा रही है, जिसे आगे बढ़ाकर सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। हाईस्पीड इंटरनेट और ई-लर्निंग सुविधाओं से लैस ये केंद्र छात्रों को आधुनिक पढ़ाई का बेहतर माहौल देंगे।

बिहार के 85 प्रखंडों में खुलेंगी डिजिटल लाप्लेटफॉर्मइब्रेरी, छात्रों को मिलेगा स्मार्ट पढ़ाई का !
बिहार विधानसभा में गुरुवार को डिजिटल लाइब्रेरी योजना को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्रेयसी सिंह ने बताया कि राज्य के 85 प्रखंडों में इसी वित्तीय वर्ष के भीतर डिजिटल लाइब्रेरी शुरू कर दी जाएंगी और इसके लिए भवन तथा स्थान की पहचान पहले ही कर ली गई है। मंत्री ने यह भी बताया कि 158 अन्य प्रखंडों में जगह चयन की प्रक्रिया जारी है। यह जानकारी उन्होंने विधायक आलोक मेहता के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में दी। सरकार का लक्ष्य राज्य के सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों में एक-एक डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित करना है। यह पहल ‘मुख्यमंत्री डिजिटल लाइब्रेरी योजना’ के तहत की जा रही है, जिसका उद्देश्य छात्रों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है। लाइब्रेरी में हाईस्पीड इंटरनेट, कंप्यूटर सिस्टम और ई-लर्निंग सामग्री उपलब्ध होगी, ताकि गांव और कस्बों के छात्र भी डिजिटल माध्यम से पढ़ाई कर सकें और प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी कर सकें। पटना के बिस्कोमान भवन में पहले से संचालित राज्य स्तरीय डिजिटल लाइब्रेरी को मॉडल के रूप में विकसित किया गया है। मंत्री ने कहा कि इसी तर्ज पर अन्य जिलों और प्रखंडों में भी लाइब्रेरी तैयार की जाएंगी। विभागीय टीमें लगातार काम की मॉनिटरिंग कर रही हैं और प्रक्रिया को तेज किया गया है। डिजिटल लाइब्रेरी के संचालन के लिए एजेंसी चयन की प्रक्रिया भी चल रही है। मानव संसाधन, उपकरण और फर्नीचर की व्यवस्था की जाएगी। सरकार का दावा है कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण डिजिटल कंटेंट उपलब्ध कराया जाएगा। इस दौरान राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने सुझाव दिया कि स्थल चयन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की राय शामिल की जाए। मंत्री ने कहा कि अभी प्रक्रिया में बदलाव से देरी हो सकती है, लेकिन भविष्य में इस सुझाव पर विचार किया जा सकता है। सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से ग्रामीण और शहरी छात्रों के बीच संसाधनों का अंतर कम होगा और विद्यार्थियों को अपने ही प्रखंड में आधुनिक पढ़ाई की सुविधा मिल सकेगी।