बिना सर्वे वाली लाखों एकड़ जमीन पर सरकार सख्त, 2 साल में होगा विशेष सर्वे पूरा !
बिना सर्वे वाली लाखों एकड़ जमीन पर सरकार सख्त, 2 साल में होगा विशेष सर्वे पूरा !
बिहार में करीब 20% जमीन का अब तक सर्वे नहीं हुआ है। विधानसभा में राजस्व मंत्री ने बताया कि लाखों एकड़ भूमि ऐसी है जिसका लगान निर्धारित नहीं है और जमाबंदी भी नहीं बनी है। सरकार ने इस समस्या को खत्म करने के लिए तय समयसीमा के साथ विशेष अभियान शुरू करने का फैसला लिया है।
बिहार में भूमि सर्वे को लेकर सरकार का बड़ा फैसला
बिहार सरकार ने जमीन से जुड़ी लंबित समस्याओं के समाधान के लिए बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है। विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने घोषणा की कि जिन जमीनों का अब तक सर्वेक्षण नहीं हुआ है, उनके लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। सरकार ने दो वर्षों के भीतर सर्वे का कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, ताकि किसानों और जमीन मालिकों को राहत मिल सके।
राज्य की 20% जमीन अब भी सर्वे से बाहर
विधानसभा में सदस्य मंजीत कुमार सिंह ने बताया कि लगभग 20 प्रतिशत भूमि का अब तक सर्वे नहीं हुआ है। इसके चलते न तो जमाबंदी हो पा रही है और न ही लगान तय हो रहा है। मंत्री ने स्वीकार किया कि बिना सर्वे की जमीन के कारण किसान सरकारी योजनाओं और अनुदान से वंचित रह जाते हैं। साथ ही जमीन की खरीद-बिक्री में भी परेशानी होती है।
उन्होंने जानकारी दी कि सर्वे का काम 2012 में शुरू हुआ, 2015 में इसकी समीक्षा हुई और 2019 में कुछ संशोधन किए गए। अब मुख्यमंत्री के निर्देश पर इसे मिशन मोड में पूरा करने का निर्णय लिया गया है।
‘जमीन की बीमारी’ से निपटने की पहल
विधान परिषद में ‘भूमि सुधार जनकल्याण संवाद’ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि भूमि विवाद विकास में बाधा डालते हैं और कई बार सामाजिक तनाव व हिंसा का कारण बनते हैं। उन्होंने इसे ‘जमीन की बीमारी’ बताया और कहा कि जनसंवाद के जरिए इसका पारदर्शी और मानवीय समाधान निकाला जा रहा है।
अब तक प्राप्त 8,363 शिकायतों में से 2,414 मामलों का त्वरित निपटारा किया जा चुका है। इस पहल की सराहना सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों के सदस्यों ने की है।
40 लाख परिमार्जन आवेदन लंबित
राजस्व महा-अभियान के तहत 46 लाख आवेदन मिले, जिनमें करीब 40 लाख परिमार्जन से संबंधित हैं। ये आवेदन नाम, खाता और खेसरा सुधार से जुड़े हैं। सरकार ने इन्हें प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का लक्ष्य तय किया है, ताकि लोगों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।
अंचल स्तर पर शिकायतों की सुनवाई
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि जटिल भूमि विवादों के समाधान के लिए अंचलवार रजिस्ट्रेशन काउंटर खोले गए हैं, जहां सीधे शिकायतें दर्ज कर सुनवाई की जा रही है। सरकार का मानना है कि भूमि विवाद केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक चुनौती भी हैं। इसलिए पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए इनका समाधान कर विकास की गति बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।