बिहार में जमीन विवाद पर कड़ा नियम, अपार्टमेंट कमेटी अनिवार्य !
बिहार में जमीन विवाद पर कड़ा नियम, अपार्टमेंट कमेटी अनिवार्य !
बिहार विधान परिषद में सरकार ने आवास प्रबंधन और भूमि विवाद को लेकर अहम फैसला लिया है. उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि सभी अपार्टमेंट परिसरों में समिति बनाना अनिवार्य होगा और जमीन से जुड़े मामलों में पुलिस सीधे दखल नहीं देगी !
जमीन मामलों में पुलिस नहीं करेगी सीधा हस्तक्षेप
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विधान परिषद में साफ कर दिया कि अब भूमि विवादों में पुलिस सीधे दखल नहीं देगी. साथ ही शहरों में तेजी से बढ़ रहे अपार्टमेंट कल्चर को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है.
अब हर अपार्टमेंट में रेजिडेंट वेलफेयर सोसाइटी (RWA) या प्रबंधन समिति का गठन कानूनी रूप से अनिवार्य किया जाएगा.
अपार्टमेंट प्रबंधन पर सरकार सख्त
सरकार का मानना है कि अपार्टमेंट परिसरों में समितियों के अभाव में रखरखाव और आपसी विवादों की समस्याएं बढ़ जाती हैं. इसी वजह से अब नियमों को सख्ती से लागू करने की तैयारी है.
उपमुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सभी अपार्टमेंट में विधिवत रजिस्टर्ड प्रबंधन समिति बनाना जरूरी होगा. इससे बिल्डरों की मनमानी पर रोक लगेगी और रखरखाव शुल्क, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य सुविधाओं पर निवासियों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित होगी.
भूमि विवाद में राजस्व अधिकारियों की भूमिका बढ़ेगी
सदन में पूछे गए एक सवाल के जवाब में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस का मुख्य काम कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, न कि सिविल प्रकृति के विवादों को सुलझाना. उन्होंने स्पष्ट किया कि अंचल अधिकारी (CO) या भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) की मौजूदगी या निर्देश के बिना पुलिस अब निजी जमीन विवादों में हस्तक्षेप नहीं करेगी.
यह फैसला उन शिकायतों के बाद लिया गया है, जिनमें पुलिस पर कथित रूप से भू-माफियाओं के साथ मिलकर जमीन कब्जा कराने के आरोप लगाए जाते रहे हैं. अब दाखिल-खारिज, सीमांकन और अन्य तकनीकी प्रक्रियाएं राजस्व विभाग की निगरानी में ही होंगी.
समीर सिंह मामले में सरकार का सख्त रुख
विधान परिषद में कांग्रेस एमएलसी डॉ. समीर सिंह की जमीन कब्जा विवाद का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा. मुंगेर जिले के टेटिया बम्बर अंचल से जुड़े इस मामले में उन्होंने जान से मारने की धमकी मिलने का आरोप लगाया है.
सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कमिश्नर और डीएम को 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है. उपमुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि राज्य में किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा और समीर सिंह को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जाएगी.